पौराणिक कथाओं के अनुसार, रंग पंचमी का दिन देवी-देवताओं को समर्पित होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन रंगों का प्रयोग करने से दुनिया में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि इस दिन जो रंग एक-दूसरे को लगाते हैं वह आसमान की ओर उड़ाते हैं। ऐसा करने से देवी-देवता आकर्षित होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।


कामदेव के पुनर्जीवन का आशीर्वाद: भगवान शिव ने फाल्गुन पूर्णिमा के दिन रति को कामदेव के पुनर्जीवन का वचन दिया था। इस खुशी में देवताओं ने रंग पंचमी पर रंगोत्सव मनाया, इसलिए इसे "देव होली" भी कहा जाता है।


यह माना जाता है कि रंग पंचमी पर रंगों के माध्यम से बुरे कर्मों और पापों का नाश होता है. रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा का विधान है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा को लाल या गुलाबी रंग का गुलाल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है.



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