�� रूहानी प्रेम योग �� बृहस्पति - चंद्र करुणा योग | त्यागशक्ति योग जब कुंडली का द्वादश भाव प्रेम के ग्रहों — चंद्र , शुक्र और बृहस्पति — के साथ शुभ संयोग में होता है , और नवांश में बृहस्पति - चंद्र की दृष्टि बनती है , तब जन्म लेती है वह स्त्री … जो इश्क़ को कैद नहीं , एक तप मानती है। जिसके लिए प्रेम कोई अधिकार नहीं — एक पूजा है । वह अपने महबूब की मुस्कान के लिए अपने वजूद तक को कुर्बान कर देती है। वह प्रेम में नहीं जलती — वह प्रेम में खुद को जला देती है। और उसी राख से उगता है वह भाव — जो हर जनम में मुकम्मल नहीं होता … " ऐसी रूहें अक्सर मिलती नहीं , मिलें तो उन्हें मोहब्बत नहीं , सजदा समझो …" ✨ यह योग बृहज्जातक , पाराशर होरा व भगवद्गीता में भी वर्णित है — जहाँ स्त्री का त्यागमयी प्रेम शक्ति बनकर उभरता है। * बृहज्जातक ( वराहमिहिर ): * " चंद्र - बृहस्पति की युति स्त्री के भीतर सौंदर्य , दया , धर्मनिष्ठा और प्रेम का जन्म देती है। यदि यह द्वादश स्थान से जुड़ी हो , तो वह स्त्री त्यागमयी और आध्यात्मिक स्वभाव की होती है। " * बृहत्पाराशर होर...
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�� “Guru Chandal Yog – Rahu aur Guru ke Rahasya ka Sabse Sahi Vedic Vishleshan” “ “ गुरु चांडाल योग का दिव्य रहस्य ” यह गहन ज्योतिषीय विवेचन @BHRIGU JYOTIRVIGYAN PEETH द्वारा प्रस्तुत है। " गुरु चांडाल योग वो अग्नि है – जो या तो साधक को तपाकर ‘ ऋषि ’ बना देती है , या जलाकर ‘ भस्म ’ कर देती है। " जब राहु गुरु के सिंहासन पर बैठ जाए – तब ज्ञान अंधकार से जूझता है। " और यही है — गुरु चांडाल योग का वास्तविक रूप। " जब गुरु चांडाल योग जागता है , तो बड़े - बड़े राजयोग भी घुटनों पर आ जाते हैं — क्योंकि यह योग ...

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